अब मैं राम के गुण गाउं
अब मैं राम के गुण गाउं,
राम के गुण गाउं अपने श्याम के गुण गाउं ... अब मैं
गंगा नहाउं न जमुना नहाउं, ना कोई तीरथ जाउं
अडसठ तीरथ है घटमांही, काहे मैं मल में नहाउं ... अब मैं.
डाली न तोडुं, पाती न तोडुं, ना कोई जीव सताउं
पात पात में राम बसत है, वहीं को शीश नमाउं ... अब मैं
योगी न होउं, न जटा रखाउं, ना अंग भभूत लगाउं,
जो रंग रंगा आप विधाता, ओर क्या रंग चढाउं ... अब मैं
जान कुल्हाडा कस कस मार शबद कमान चढाउ
पांचो चोर बसे घट मांही वहीं को मार भगाउं ... अब मैं
चांद सूर्य दोनों सम कर जानुं, प्रेम की सेज बिछाउं,
कहत कबीर सुनो भाई साधो, आवागमन मीटाउ ... अब मैं
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