अवसर बार बार नहिं आवै
अवसर बार बार नहिं आवै…
जो चाहो करि लेव भलाई, जनम जनम सुख पावै… अवसर
तन मन धन में नहिं कछु अपना, छांडी पलक में जावै
तन छूटे धन कौन काम के, कृपिन काहे को कहावै… अवसर
सुमिरन भजन करो साहब को, जासे जीव सुख पावै,
कहत कबीर पग धरे पंथ पर, यम के गण न सतावै… अवसर.
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