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शनिवार, 14 सितंबर 2019

राजस्थान चालीसा ध्यान से पढ़े और आगे भी शेयर करें जय श्री राम।

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👌👍 *🐪 राजस्थान चालीसा🐪*
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🌹 *उत्तर देख्यो दिख्खणं देख्यो*
*_देश दिसावर सारा देख्या, पणं!*
*हीरा तो चमके है बालू रेत में।*
*मोतीडा भलके है म्हारा देस में।*👇

🌹 *रणबंका सिरदार अठै है।*
*मोटा साहूकार अठै है।*
*तीखोडी तलवार अठै है।*
*भालां री भणकार अठै है।*
*साफा छुणगादार अठै है।*
*नितरा तीज तिंवार अठै है।"*
*बाजर मोठ जंवार अठै है।*
*मीठोडी मनवार अठै है।*
*अन धन रा भंडार अठै है।*
*दानी अर दातार अठै है।*
*कामणगारी नार अठै है।*
*मुंछ्यांला मोट्यार अठै है।*
*पो पाटी परभात अठै है।*
*तारां छाई रात अठै है।*
*अर,तेजो तो गावे है करसा खेत में।*
* *हीरा तो चमके है!* ४
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🌹 *झीणो जैसलमेर अठै है।*
*बांको बीकानेर अठै है।*
*जोधाणों जालोर अठे है ।*
*अलवर अर आमेर अठै है।*
*सिवाणों सांचोर अठै है।*
*जैपुर सांगानेर अठै है।*
*रुडो र५५५५णथंबोर अठै है।*
*भरतपुर नागौर अठै है।*
*उदयापुर मेवाड अठै है।*
*मोटो गढ चित्तोड अठै है।*
*झुंझनूं सीकर शहर अठै है।*
*कोटा पाटणं फेर अठै है।*
*आबू अर अजमेर अठै है।*
*छोटा मोटा फेर अठै है।*
*अर,डूगरपुर सुहाणों वागड देस में।*
*हीरा तो चमके है!"*
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🌹 *पाणीं री पणिहार अठै है।*
*4तीजां तणां तिंवार अठै है।*
*रुपलडी गणगौर अठै है।*
*३⁴सारस कुरजां मोर अठै है।*
*पायल री झणकार अठै है।*
*चुडलां री खणकार अठै है।*
*अलगोजां री तान अठै है।*
*घूंघट में मुसकान अठै है।*
*खमां घणीं रो मान अठै है।*
*मिनखां री पहचाण अठै है।*
*मिनखां में भगवान अठै है।*
*घर आया मेहमान अठै है।*
*मीठी बोली मान अठै है।*
*दया धरम अर दान अठै है।*
*अर मनडा तो रंगियोडा मीठा हेत में।*
*हीरा तो चमके है बालू रेत में।*
*मोतीडा भलके है म्हारा देस में।*
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*🌹गौरी पुत्र गणेश अठै है।*
*मीरां बाई रो देश अठै है।*
*मोटो पुष्कर धाम अठै है।*
*सालासर हनुमान अठै है।*
*रूणीचे रा राम अठै है।*
*गलता तीरथ धाम अठै है।*
*महावीर भगवान अठै है।*
*खाटू वाला श्याम अठै है।*
*चारभुजा श्रीनाथ अठै है।*
*मेंहदीपुर हनुमान अठै है।*
*दधिमती री गोठ अठै है।*
*रणचंडी तन्नोट अठै है।*
*करणी मां रो नांव अठै है।*
*डिग्गीपुरी कल्याण अठै है।*
*गोगाजी रा थान अठै है।*
*सेवा भगती ग्यान अठै है।*
*अर कितरो तो बखाणूं* *मरुधर देश नें।*
*हीरा तो चमके है!*
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*🌹जौहर रा सैनाणं अठै है।*
*गढ किला मैदान अठै है।*
*हरिया भरिया खेत अठै है।*
*मुखमल जेडी रेत अठै है।*
*मकराणा री खान अठै है।*
*मेहनतकश इंशान अठै है।*
*पगडी री पहचाणं अठै है।*
*ऊंटां सज्या पिलाणं अठै है।*
*चिरमी घूमर गैर अठै है।*
*मेला च्यारूंमेर अठै है।*
*सीधी सादी चाल अठै है।*
*गीतां में भी गाल अठै है।*
*सीमाडे री बाड अठै है।*
*बेरयां रा शमशाणं अठै है।*
*तिवाडी रो देश अठै है।*
*ऐडी धरती फेर कठै है ।*
*साचु केवूं झूठ कठै है ।*
*समझौ तो बैंकूठ अठै है।*
*अर आवो नीं पधारो म्हारा देश में।*
*हीरा तो चमके है बालू रेत में।*
*मोतीडा झलके है म्हारा देश में।*

*👌👍एक रचनाकार द्वारा रचित इस राजस्थान चालिसा को अपने किमती समय का कुछ पल निकाल कर एक बार जरूर पढ़ लें अगर दिल को छु जायेंगे तो आगे फारवर्ड करें ।*👍🙏
*धन्यवाद*

🙏🙏🇧🇴🇧🇴🚩🚩🙏🙏

मंगलवार, 10 सितंबर 2019

मुंसी प्रेमचंद जी की एक सुंदर कविता, जिसके एक-एक शब्द को बार-बार पढ़ने को मन करता है-_* _ख्वाहिश नहीं मुझे_ _मशहूर होने की,"_ _आप मुझे पहचानते हो_ _बस इतना ही काफी है।_ _अच्छे ने अच्छा और_ _बुरे ने बुरा जाना मुझे,_ _जिसकी जितनी जरूरत थी_ _उसने उतना ही पहचाना मुझे!_ _जिन्दगी का फलसफा भी_ _कितना अजीब है,_ _शामें कटती नहीं और_ _साल गुजरते चले जा रहे हैं!_ _एक अजीब सी_ _'दौड़' है ये जिन्दगी,_ _जीत जाओ तो कई_ _अपने पीछे छूट जाते हैं और_ _हार जाओ तो_ _अपने ही पीछे छोड़ जाते हैं!_ _बैठ जाता हूँ_ _मिट्टी पे अक्सर,_ _मुझे अपनी_ _औकात अच्छी लगती है।_ _मैंने समंदर से_ _सीखा है जीने का सलीका,_ _चुपचाप से बहना और_ _अपनी मौज में रहना।_ _ऐसा नहीं कि मुझमें_ _कोई ऐब नहीं है,_ _पर सच कहता हूँ_ _मुझमें कोई फरेब नहीं है।_ _जल जाते हैं मेरे अंदाज से_ _मेरे दुश्मन,_ _एक मुद्दत से मैंने_ _न तो मोहब्बत बदली_ _और न ही दोस्त बदले हैं।_ _एक घड़ी खरीदकर_ _हाथ में क्या बाँध ली,_ _वक्त पीछे ही_ _पड़ गया मेरे!_ _सोचा था घर बनाकर_ _बैठूँगा सुकून से,_ _पर घर की जरूरतों ने_ _मुसाफिर बना डाला मुझे!_ _सुकून की बात मत कर_ _ऐ गालिब,_ _बचपन वाला इतवार_ _अब नहीं आता!_ _जीवन की भागदौड़ में_ _क्यूँ वक्त के साथ रंगत खो जाती है ?_ _हँसती-खेलती जिन्दगी भी_ _आम हो जाती है!_ _एक सबेरा था_ _जब हँसकर उठते थे हम,_ _और आज कई बार बिना मुस्कुराए_ _ही शाम हो जाती है!_ _कितने दूर निकल गए_ _रिश्तों को निभाते-निभाते,_ _खुद को खो दिया हमने_ _अपनों को पाते-पाते।_ _लोग कहते हैं_ _हम मुस्कुराते बहुत हैं,_ _और हम थक गए_ _दर्द छुपाते-छुपाते!_ _खुश हूँ और सबको_ _खुश रखता हूँ,_ _लापरवाह हूँ ख़ुद के लिए_ _मगर सबकी परवाह करता हूँ।_ _मालूम है_ _कोई मोल नहीं है मेरा फिर भी_ _कुछ अनमोल लोगों से_ _रिश्ते रखता हूँ।_ 🌹🌹🌹🤝शुभेच्छु

मुंसी प्रेमचंद जी की एक सुंदर कविता, जिसके एक-एक शब्द को बार-बार पढ़ने को मन करता है-_*

_ख्वाहिश नहीं मुझे_
_मशहूर होने की,"_

        _आप मुझे पहचानते हो_
        _बस इतना ही काफी है।_

_अच्छे ने अच्छा और_
_बुरे ने बुरा जाना मुझे,_

        _जिसकी जितनी जरूरत थी_
        _उसने उतना ही पहचाना मुझे!_

_जिन्दगी का फलसफा भी_
_कितना अजीब है,_

        _शामें कटती नहीं और_
        _साल गुजरते चले जा रहे हैं!_

_एक अजीब सी_
_'दौड़' है ये जिन्दगी,_

        _जीत जाओ तो कई_
        _अपने पीछे छूट जाते हैं और_

_हार जाओ तो_
_अपने ही पीछे छोड़ जाते हैं!_

_बैठ जाता हूँ_
_मिट्टी पे अक्सर,_

        _मुझे अपनी_
        _औकात अच्छी लगती है।_

_मैंने समंदर से_
_सीखा है जीने का सलीका,_

        _चुपचाप से बहना और_
        _अपनी मौज में रहना।_

_ऐसा नहीं कि मुझमें_
_कोई ऐब नहीं है,_

        _पर सच कहता हूँ_
        _मुझमें कोई फरेब नहीं है।_

_जल जाते हैं मेरे अंदाज से_
_मेरे दुश्मन,_

              _एक मुद्दत से मैंने_
       _न तो मोहब्बत बदली_
      _और न ही दोस्त बदले हैं।_

_एक घड़ी खरीदकर_
_हाथ में क्या बाँध ली,_

        _वक्त पीछे ही_
        _पड़ गया मेरे!_

_सोचा था घर बनाकर_
_बैठूँगा सुकून से,_

        _पर घर की जरूरतों ने_
        _मुसाफिर बना डाला मुझे!_

_सुकून की बात मत कर_
_ऐ गालिब,_

        _बचपन वाला इतवार_
        _अब नहीं आता!_

_जीवन की भागदौड़ में_
_क्यूँ वक्त के साथ रंगत खो जाती है ?_

        _हँसती-खेलती जिन्दगी भी_
        _आम हो जाती है!_

_एक सबेरा था_
_जब हँसकर उठते थे हम,_

        _और आज कई बार बिना मुस्कुराए_
        _ही शाम हो जाती है!_

_कितने दूर निकल गए_
_रिश्तों को निभाते-निभाते,_

        _खुद को खो दिया हमने_
        _अपनों को पाते-पाते।_

_लोग कहते हैं_
_हम मुस्कुराते बहुत हैं,_

        _और हम थक गए_
        _दर्द छुपाते-छुपाते!_

_खुश हूँ और सबको_
_खुश रखता हूँ,_

        _लापरवाह हूँ ख़ुद के लिए_
        _मगर सबकी परवाह करता हूँ।_

_मालूम है_
_कोई मोल नहीं है मेरा फिर भी_

        _कुछ अनमोल लोगों से_
        _रिश्ते रखता हूँ।_
🌹🌹🌹🤝शुभेच्छु

गुरुवार, 5 सितंबर 2019

शिक्षक दिवस स्पेशल प्रेरक प्रसंग हिंदी teachers day 2019

🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮
*आज का प्रेरक प्रसंग*

*Teacher’s Day 2019:*

*डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को उनकी जयंती पर सम्मानित करने के लिए हर साल *5 सितंबर को शिक्षक दिवस (Teacher’s Day)* *मनाया जाता है. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के* *पहले उपराष्ट्रपति* और *दूसरे राष्ट्रपति* *थे. डॉ. राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर, 1888 को हुआ था.*

*Teacher’s Day 2019 के अवसर पर डॉ. राधाकृष्णन की 131वीं जयंती भी मनाई जाएगी. डॉ. राधाकृष्णन का मानना था कि शिक्षकों के पास देश का सर्वश्रेष्ठ दिमाग होना चाहिए. वर्ष 1962 से, जिस वर्ष वे भारत के दूसरे राष्ट्रपति बने, शिक्षक दिवस उनके जन्मदिन पर मनाया जाने लगा.*

*Teacher’s Day का महत्व*

*Teacher’s Day अथवा शिक्षक दिवस का उद्देश्य किसी व्यक्ति के जीवन को आकार देने में सभी शिक्षकों के योगदान को महत्व देना है. इस दिन स्कूलों में छुट्टी नहीं होती और छात्रों को स्कूल जाना होता है. हालांकि स्कूल में सामान्य कक्षाओं को उत्सव की गतिविधियों से बदल दिया जाता है और शिक्षकों को उनकी कड़ी मेहनत और छात्र के शैक्षिक जीवन में अंतहीन योगदान के लिए सम्मानित किया जाता है. शिक्षक दिवस उन सभी शिक्षकों, गुरुओं और गुरुओं को समर्पित है जो अपने छात्रों को बेहतर मानव बनने के लिए उनका मार्गदर्शन करते हैं.*

*कैसे हुई शुरुआत?*

*_डॉ. राधाकृष्णन के जन्मदिन के शुभ अवसर पर उनके छात्रों और दोस्तों ने उनसे उनका जन्मदिन मनाने की अनुमति देने का अनुरोध किया, लेकिन जवाब में डॉ. राधाकृष्णन ने कहा कि “मेरे जन्मदिन को अलग से मनाने के बजाय, यह सौभाग्य की बात होगी कि 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए.”_*

*डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को मिले सम्मान*

*• डॉ. राधाकृष्णन को 1954 में भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया गया था.*
*• उन्हें कई अन्य प्रतिष्ठित पुरस्कारों के साथ-साथ 1931 में नाइटहुड और 1963 में ब्रिटिश रॉयल ऑर्डर ऑफ मेरिट की मानद सदस्यता से सम्मानित किया गया.*
*• डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को नोबेल पुरस्कार के लिए 27 बार, साहित्य में नोबेल पुरस्कार के लिए 16 बार और नोबेल शांति पुरस्कार के लिए 11 बार नामांकित किया गया था*

*

सोमवार, 12 अगस्त 2019

दिल को छूने वाली बात

 तुम हंसी ना ला सको, उनकी आँखों में आंसू लाने का भी तुम्हे कोई हक़ नही है




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वो बात क्या करें जिसकी कोई खबर ना हो।


वो दुआ क्या करें जिसका कोई असर ना हो।

कैसे कह दे कि लग जाय हमारी उमर आपको।

क्या पता अगले पल हमारी उमर ना हो।



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मोहब्बत मुकद्दर है कोई ख़्वाब नही।

ये वो अदा है जिसमें हर कोई कामयाब नही।

जिन्हें मिलती मंज़िल उंगलियों पे वो खुश है।

मगर जो पागल हुए उनका कोई हिसाब नही।



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दर्द को दर्द अब होने लगा है।

दर्द अपने गम पे खुद रोने लगा है।

अब हमें दर्द से दर्द नही लगेगा।

क्योंकि दर्द हमको छू कर खुद सोने लगा है।



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दिल मे आरज़ू के दिये जलते रहेगे।

आँखों से मोती निकलते रहेगे।

तुम शमा बन कर दिल में रोशनी करो।

हम मोम की तरह पिघलते रहेंगे।



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सामने मंजिल तो रास्ते ना मोड़ना ।

जो मन मे हो वो ख़्वाब ना तोड़ना ।

हर कदम पर मिलेगी सफ़लता ।

बस आसमान छूने के लिए जमीन ना छोड़ना ।



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प्यार में मौत से डरता कोन है ।

प्यार हो जाता है करता कोन है।

आप जैसे यार पर हम तो क्या सारी दुनियां फिदा है।

लेकिन हमारी तरह आप पर मरता कौन है।



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चेहरे पर हँसी छा जाती है।

आँखों में सुरूर आ जाता है।

जब तुम मुझे अपना कहते हो।

अपने आप पर ग़ुरूर आ जाता है।



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रविवार, 11 अगस्त 2019

जिसोरो करा देवे इस राजस्थानी भाषा की कविता पढ़े और उसके बाद अपने तीन दोस्तों को भी भेजें वे तीन और तीन को भेजेंगे। राजस्थानी होतो शेयर करें

🙏😋 'जिसोरो करा देवे' 😋🙏

'गूंदपाक' सियाळे में,
'दही-छाछ' उँधाळे में,
'चीलड़ो' बरसात में,
'डॉयफ्रूट' बारात में...जिसोरो करा देवे।

गलरको 'खीर' रो,
'कोफ़्तो' पनीर रो,
रंग केसर 'फीणी' रो,
'चूरमो' देसण चीणी रो...जिसोरो करा देवे।

रोटी 'बाजरी' री,
चटणी 'काचरी' री,
'रोटियो' भोभर(१) रो,
'बड़ो' मोठ मोगर रो...जिसोरो करा देवे।

सबड़को 'राबड़ी' रो,
स्वाद 'गुलाबड़ी' रो,
साग 'काचर फळी' रो,
मिठास 'गुड़' री डळी रो...जिसोरो करा देवे।

खुपरी 'मतीरे' री,
खुशबु 'सीरे' री,
अचार 'सांगरी केर' रो,
'भुजियो' बीकानेर रो...जिसोरो करा देवे।

'कचौड़ी' दाळ री,
''जळेबी' घाळ री,
'खीचड़ो' बाजरी मोठ रो,
मजो सावण री 'गोठ' रो...जिसोरो करा देवे।

चरकास 'कोकले'(२) रो,
रायतो 'फोगले' रो,
जायको 'खजूर' रो,
लाडू 'मोतीचूर' रो...जिसोरो करा देवे।

'दूध' घर री गाय रो,
सुर्डको गर्म 'चाय' रो,
'राजभोग' छीणे रो,
शर्बत 'केरी पोदीणे'' रो...जिसोरो करा देवे।

कतली 'बिदाम' री,
बात्यां "मारवाड़ी" री,
मीठो पत्तो 'पान' रो,
खाणो 'राजस्थान' रो...जिसोरो करा देवे।
🙏जय जय राजस्थान🙏
(१) भोभर  =  थेपड़ी रा खीरा ।
(२) कोकला = छिलके सहित काट कर
                     सुकायोडा छोटा काचर।

शुक्रवार, 9 अगस्त 2019

स्वतंत्रता दिवस भाषण 2

स्वतंत्रता दिवस भाषण 2


यहां उपस्थित सभी सम्मानित टीचर्स और मेरे प्रिय दोस्तों को गर्मजोशी के साथ गुड मॉर्निंग। आज हम यहा 15 अगस्त पर स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाने के लिए एजुट हुए हैं। हम हर साल बहुत उत्साह और खुशी के साथ इस दिन को मनाते हैं क्योंकि हमारे देश ने 1947 को ब्रिटिश शासन से आजादी पाई थी। हम यहां स्वतंत्रता दिवस जश्न मनाने के लिए आए हैं।। यह सभी भारतीयों के लिए महान और सबसे महत्वपूर्ण दिन है। भारत के लोगों ने कइ सालों तक ब्रिटिश शाशन के क्रूर व्यवहार के सहा था। आज हमें लगभग सभी क्षेत्रों जैसे शिक्षा, खेल, परिवहन, व्यवसाय इत्यादि में हमारे पूर्वजों की वजह से स्वतंत्रता मिली। 1947 से पहले लोगों को इतनी भी स्वतंत्रता नहीं थी वो अपने शरीर और दिमाग पर को ज्यादा इस्तेमाल कर सकें। वे अंग्रेजों के गुलाम थे और उन के सभी आदेशों का पालन करने के लिए मजबूर थे। लेकिन आज के भारत में हम महान भारतीय नेताओं की वजह से कुछ भी करने के लिए स्वतंत्र हैं, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ आजादी पाने के लिए कई सालों तक संघर्ष किया।


स्वतंत्रता दिवस का त्योहार बहुत ही खुशी के साथ भारत के लोग मनाते हैं। यह दिन सभी भारतीय नागरिकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमें उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों को याद करने का मौका होता है जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया। आजादी से पहले लोगों को पढ़ाई, अच्छा खाना खाना और हमारे जैसे सामान्य जीवन जीने की इजाज नहीं थी। भारत में लोगों को स्वतंत्रता के लिए कुछ घटनाएं जिम्मेदार हैं। भारतीयों को ब्रिटिश हुकुमत द्वारा गुलामों की तुलना में अधिक बुरी तरह से व्यवहार किया जाता था ताकि वो अपने किसी भी आदेशों को पूरा कर सकें।


भारत के कई महान स्वतंत्रता सेनानी जैसे नेताजी सुभाष चंद्र बोस, जवाहर लाल नेहरू, महात्मा गांधी, बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, भगत सिंह, खुदी राम बोस और चंद्रशेखर आज़ाद। वो सबसे प्रसिद्ध देशभक्त थे, जिन्होंने भारत की आजादी के लिए आखिरी सांस तक संघर्ष किया। हम कल्पना नहीं कर सकते कि हमारे पूर्वजों ने कितना कड़ा संघर्ष किया है। अब, स्वतंत्रता के कई सालों के बाद हमारा देश विकास के सही रास्ते चल रहा है। आज पूरी दुनिया में हमारा देश एक लोकतांत्रिक देश के रुप में स्थापित हो चुका है। गांधी जी एक महान नेता थे, जिन्होंने हमें अहिंसा और सत्यगृह का पाठ पढ़ाया। गांधी जी ने अहिंसा और शांति के साथ स्वतंत्र भारत का सपना देखा था।


भारत हमारी मातृ भूमि है और हम इसके नागरिक हैं। हमें हमेशा गंदे लोगों से बचाने के लिए तैयार रहना चाहिए। यह हमारा दायित्व है कि हम अपने देश को आगे बढ़ाएं और इसे दुनिया का सबसे सर्वश्रेष्ठ देश बनाएं।


जय हिन्द


स्वतंत्रता दिवस भाषण 1

स्वतंत्रता दिवस भाषण 1


मेरे सभी प्रिय शिक्षकों, माता-पिता और प्यारे दोस्तों को गुड मॉर्निंग। आज हम यहां इस महान राष्ट्रीय कार्यक्रम का जश्न मनाने के लिए इकट्ठा हुए हैं। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि स्वतंत्रता दिवस हम सभी के लिए एक बहुत ही शुभ अवसर है। भारत का स्वतंत्रता दिवस सभी भारतीय नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण दिन है और इतिहास में इसका जिक्र किया गया है। ये वो दिन है जब हमारे भारत के महान स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा कई सालों के संघर्ष के बाद ब्रिटिश शासन से आजादी पाई थी। हम हर साल 15 अगस्त पर स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं इस दिन को आजादी के पहले दिन के रूप में मनाने के लिए और साथ ही उन महान सभी नेताओं के बलिदानों को भी याद करते हैं, जिन्होंने भारत को आजादी दिलाने में अपना बलिदान दिया

स्वतंत्रता दिवस


भारत 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश शासन से आजाद हुई था। उसके बाद हम सभी को अपनी मातृ भूमि और अपने देश में अपने मौलिक अधिकार मिले। हम सभी को एक भारतीय होने पर गर्व महसूस करना चाहिए और अपने भाग्य की प्रशंसा करनी चाहिए कि हमने एक स्वतंत्र भारत की भूमि पर जन्म लिया। गुलामी के दौरान भारत का इतिहास सब कुछ बताता है। कैसे हमारे पूर्वजों ने कड़ा संघर्ष किया था और अंग्रेजों का सामना किया था। हम यहां बैठकर कल्पना नहीं कर सकते हैं कि ब्रिटिश शासन से भारत के लिए आजादी कितनी कठिन थी। साल 1857 से 1947 तक हमारे कई स्वतंत्रता सेनानियों ने कई दशकों तक संघर्ष कर बलिदान दिया। सबसे पहले 1857 में भारतीय सैनिक (मंगल पांडे) ने पहली बार ने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ आवाज उठाई थी।


उसके बाद कई महान स्वतंत्रता सेनानियों ने आजादी के लिए लंबा संघर्ष किया। उन्होंने सिर्फ आजादी के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। हम भगत सिंह, खुदी राम बोस और चंद्रशेखर आजाद के बलिदानों को कभी नहीं भूल सकते। जिन्होंने अपने देश के लिए लड़ने के लिए कम उम्र में ही अपनी बलिदान दे दिया। हम नेताजी और गांधीजी के सभी संघर्षों को कैसे नजरअंदाज कर सकते हैं। गांधीजी एक महान व्यक्ति थे, जिन्होंने भारत ही नहीं पूरी दुनिया को अहिंसा का एक बड़ा पाठ पढ़ाया था। वहीं एक ऐसे थे जिन्होंने भारत को अहिंसा की मदद से स्वतंत्रता दिलाने के लिए नेतृत्व किया था। आखिरकार एक लंबे संघर्ष के बाद 15 अगस्त 1947 को भारत को आजादी मिली।


दोस्तों हम इतने भाग्यशाली है कि हमारे पूर्वजों ने हमें शांति और खुशियों की भूमि दी, जहां हम पूरी रात बिना किसी डर के सो सकते हैं और अपने स्कूल या घर में पूरे दिन का शांति और आनंद के साथ रह सकते हैं। हमारा देश प्रौद्योगिकी, शिक्षा, खेल, वित्त और अन्य विभिन्न क्षेत्रों में बहुत तेजी से विकास कर रहा है। आजादी से पहले यह संभव नहीं था। अब भारत परमाणु शक्ति संपन्न देशों में से एक है। हम ओलंपिक, राष्ट्रमंडल खेल और एशियाई जैसे खेलों में सक्रिय रूप से भाग लेकर आगे बढ़ रहे हैं। हमें अपनी सरकार चुनने और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का अधिकार है। हां... हम स्वतंत्र हैं और हमें पूरी स्वतंत्रता है। लेकिन हमें अपने देश के प्रति जिम्मेदारियों से मुक्त नहीं समझना चाहिए। देश के जिम्मेदार नागरिक होने के नाते, हमें अपने देश में किसी भी आपातकालीन स्थिति को संभालने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।




सोमवार, 29 जुलाई 2019

मैं हर बार गिरा और सम्भलता रहा, सुप्रभात संदेश

मैं हर बार गिरा और सम्भलता रहा, सुप्रभात संदेश




नमस्कार दोस्तों फॉलो कर दीजिए ताकि आप पढ़े हमारी खबरें सबसे पहले।


दोस्तों स्वागत है आपका इस चैनल में जहां पर आपको कुछ ना कुछ हमेशा नया मिलता है आज मैं आप के लिए लेकर आया है। सुप्रभात संदेश



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ये नशे का दौर, ये तेवर तुम्हारे,

उभरने से पहले न डूबें सितारे,

भँवर से लड़ो तुम लहरों से उलझो,

कहाँ तक चलोगे किनारे किनारे।

बारिश में रख दूं ज़िन्दगी को ताकि धुल जाए पन्नों की स्याही,

जिंदगी फिर से लिखने का मन करता था कभी-कभी।



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मैं हर बार गिरा और सम्भलता रहा,

दौर खुदा की रहमतों का चलता रहा,

वक़्त भले ही मेरे विपरीत था,

मैं ना जरा सा भी भयभीत था,

मुझे यकीं था की एक दिन सूरज जरूर निकलेगा,

क्या हुआ जो वो हर रोज ढलता रहा,

मैं हर बार गिरा और सम्भलता रहा,

जब भी हुआ है दीपक में तेल खत्म,

तो समझो हो गया खेल खत्म,

निचोड़ कर खून रगों का इसमें,

मैं एक दीपक की भाँति जलता रहा,

मैं हर बार गिरा और सम्भलता रहा,

झिलमिल से ख्वाब थे इन निगाहों में,

करता रहा महनत माँ की दुआओं में,

सींचता रहा परिश्रम के पौधे को दिन रात,

और ये पौधा सफलता के पेड़ में बदलता रहा,

मैं हर बार गिरा और सम्भलता रहा,

ये सब तुम्हारी सबकी दुआओं का असर है,

जो मिली आज इतनी सुहानी डगर है,

तह दिल से शुक्रिया मेरे चाहने वालों,

आज मेरी किस्मत का सिक्का उछलता रहा,

मैं हर बार गिरा और सम्भलता रहा,

दौर खुदा की रहमतों का चलता रहा।



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शनिवार, 20 जुलाई 2019

Hearttouching story in hindi दिल को छू लेने वाली एक हिंदी कहानी पसंद आये तो शेयर करें

मैं एक घर के करीब से गुज़र रहा था की अचानक से मुझे उस घर के अंदर से एक बच्चे की रोने की आवाज़ आई। उस बच्चे की आवाज़ में इतना दर्द था कि अंदर जा कर वह बच्चा क्यों रो रहा है, यह मालूम करने से मैं खुद को रोक ना सका।

अंदर जा कर मैने देखा कि एक माँ अपने दस साल के बेटे को आहिस्ता से मारती और बच्चे के साथ खुद भी रोने लगती। मैने आगे हो कर पूछा बहनजी आप इस छोटे से बच्चे को क्यों मार रही हो? जब कि आप खुद भी रोती हो।

उस ने जवाब दिया भाई साहब इस के पिताजी भगवान को प्यारे हो गए हैं और हम लोग बहुत ही गरीब हैं, उन के जाने के बाद मैं लोगों के घरों में काम करके घर और इस की पढ़ाई का खर्च बामुश्किल उठाती हूँ और यह कमबख्त स्कूल रोज़ाना देर से जाता है और रोज़ाना घर देर से आता है।

जाते हुए रास्ते मे कहीं खेल कूद में लग जाता है और पढ़ाई की तरफ ज़रा भी ध्यान नहीं देता है जिस की वजह से रोज़ाना अपनी स्कूल की वर्दी गन्दी कर लेता है। मैने बच्चे और उसकी माँ को जैसे तैसे थोड़ा समझाया और चल दिया।

इस घटना को कुछ दिन ही बीते थे की एक दिन सुबह सुबह कुछ काम से मैं सब्जी मंडी गया। तो अचानक मेरी नज़र उसी दस साल के बच्चे पर पड़ी जो रोज़ाना घर से मार खाता था। मैं क्या देखता हूँ कि वह बच्चा मंडी में घूम रहा है और जो दुकानदार अपनी दुकानों के लिए सब्ज़ी खरीद कर अपनी बोरियों में डालते तो उन से कोई सब्ज़ी ज़मीन पर गिर जाती थी वह बच्चा उसे फौरन उठा कर अपनी झोली में डाल लेता।

मैं यह नज़ारा देख कर परेशानी में सोच रहा था कि ये चक्कर क्या है, मैं उस बच्चे का चोरी चोरी पीछा करने लगा। जब उस की झोली सब्ज़ी से भर गई तो वह सड़क के किनारे बैठ कर उसे ऊंची ऊंची आवाज़ें लगा कर वह सब्जी बेचने लगा। मुंह पर मिट्टी गन्दी वर्दी और आंखों में नमी, ऐसा महसूस हो रहा था कि ऐसा दुकानदार ज़िन्दगी में पहली बार देख रहा हूँ ।

अचानक एक आदमी अपनी दुकान से उठा जिस की दुकान के सामने उस बच्चे ने अपनी नन्ही सी दुकान लगाई थी, उसने आते ही एक जोरदार लात मार कर उस नन्ही दुकान को एक ही झटके में रोड पर बिखेर दिया और बाज़ुओं से पकड़ कर उस बच्चे को भी उठा कर धक्का दे दिया।

वह बच्चा आंखों में आंसू लिए चुप चाप दोबारा अपनी सब्ज़ी को इकठ्ठा करने लगा और थोड़ी देर बाद अपनी सब्ज़ी एक दूसरे दुकान के सामने डरते डरते लगा ली। भला हो उस शख्स का जिस की दुकान के सामने इस बार उसने अपनी नन्ही दुकान लगाई उस शख्स ने बच्चे को कुछ नहीं कहा।

थोड़ी सी सब्ज़ी थी ऊपर से बाकी दुकानों से कम कीमत। जल्द ही बिक्री हो गयी, और वह बच्चा उठा और बाज़ार में एक कपड़े वाली दुकान में दाखिल हुआ और दुकानदार को वह पैसे देकर दुकान में पड़ा अपना स्कूल बैग उठाया और बिना कुछ कहे वापस स्कूल की और चल पड़ा। और मैं भी उस के पीछे पीछे चल रहा था।

बच्चे ने रास्ते में अपना मुंह धो कर स्कूल चल दिया। मै भी उस के पीछे स्कूल चला गया। जब वह बच्चा स्कूल गया तो एक घंटा लेट हो चुका था। जिस पर उस के टीचर ने डंडे से उसे खूब मारा। मैने जल्दी से जा कर टीचर को मना किया कि मासूम बच्चा है इसे मत मारो। टीचर कहने लगे कि यह रोज़ाना एक डेढ़ घण्टे लेट से ही आता है और मै रोज़ाना इसे सज़ा देता हूँ कि डर से स्कूल वक़्त पर आए और कई बार मै इस के घर पर भी खबर दे चुका हूँ।

खैर बच्चा मार खाने के बाद क्लास में बैठ कर पढ़ने लगा। मैने उसके टीचर का मोबाइल नम्बर लिया और घर की तरफ चल दिया। घर पहुंच कर एहसास हुआ कि जिस काम के लिए सब्ज़ी मंडी गया था वह तो भूल ही गया। मासूम बच्चे ने घर आ कर माँ से एक बार फिर मार खाई। सारी रात मेरा सर चकराता रहा।

सुबह उठकर फौरन बच्चे के टीचर को कॉल की कि मंडी टाइम हर हालत में मंडी पहुंचें। और वो मान गए। सूरज निकला और बच्चे का स्कूल जाने का वक़्त हुआ और बच्चा घर से सीधा मंडी अपनी नन्ही दुकान का इंतेज़ाम करने निकला। मैने उसके घर जाकर उसकी माँ को कहा कि बहनजी आप मेरे साथ चलो मै आपको बताता हूँ, आप का बेटा स्कूल क्यों देर से जाता है।

वह फौरन मेरे साथ मुंह में यह कहते हुए चल पड़ीं कि आज इस लड़के की मेरे हाथों खैर नही। छोडूंगी नहीं उसे आज। मंडी में लड़के का टीचर भी आ चुका था। हम तीनों ने मंडी की तीन जगहों पर पोजीशन संभाल ली, और उस लड़के को छुप कर देखने लगे। आज भी उसे काफी लोगों से डांट फटकार और धक्के खाने पड़े, और आखिरकार वह लड़का अपनी सब्ज़ी बेच कर कपड़े वाली दुकान पर चल दिया।

अचानक मेरी नज़र उसकी माँ पर पड़ी तो क्या देखता हूँ कि वह  बहुत ही दर्द भरी सिसकियां लेकर लगा तार रो रही थी, और मैने फौरन उस के टीचर की तरफ देखा तो बहुत शिद्दत से उसके आंसू बह रहे थे। दोनो के रोने में मुझे ऐसा लग रहा था जैसे उन्हों ने किसी मासूम पर बहुत ज़ुल्म किया हो और आज उन को अपनी गलती का एहसास हो रहा हो।

उसकी माँ रोते रोते घर चली गयी और टीचर भी सिसकियां लेते हुए स्कूल चला गया। बच्चे ने दुकानदार को पैसे दिए और आज उसको दुकानदार ने एक लेडी सूट देते हुए कहा कि बेटा आज सूट के सारे पैसे पूरे हो गए हैं। अपना सूट ले लो, बच्चे ने उस सूट को पकड़ कर स्कूल बैग में रखा और स्कूल चला गया।

आज भी वह एक घंटा देर से था, वह सीधा टीचर के पास गया और बैग डेस्क पर रख कर मार खाने के लिए अपनी पोजीशन संभाल ली और हाथ आगे बढ़ा दिए कि टीचर डंडे से उसे मार ले। टीचर कुर्सी से उठा और फौरन बच्चे को गले लगा कर इस क़दर ज़ोर से रोया कि मैं भी देख कर अपने आंसुओं पर क़ाबू ना रख सका।

मैने अपने आप को संभाला और आगे बढ़कर टीचर को चुप कराया और बच्चे से पूछा कि यह जो बैग में सूट है वह किस के लिए है। बच्चे ने रोते हुए जवाब दिया कि मेरी माँ अमीर लोगों के घरों में मजदूरी करने जाती है और उसके कपड़े फटे हुए होते हैं कोई जिस्म को पूरी तरह से ढांपने वाला सूट नहीं और और मेरी माँ के पास पैसे नही हैं इस लिये अपने माँ के लिए यह सूट खरीदा है।

तो यह सूट अब घर ले जाकर माँ को आज दोगे? मैने बच्चे से सवाल पूछा। जवाब ने मेरे और उस बच्चे के टीचर के पैरों के नीचे से ज़मीन ही निकाल दी। बच्चे ने जवाब दिया नहीं अंकल छुट्टी के बाद मैं इसे दर्जी को सिलाई के लिए दे दूँगा। रोज़ाना स्कूल से जाने के बाद काम करके थोड़े थोड़े पैसे सिलाई के लिए दर्जी के पास जमा किये हैं।

टीचर और मैं सोच कर रोते जा रहे थे कि आखिर कब तक हमारे समाज में गरीबों और विधवाओं के साथ ऐसा होता रहेगा उन के बच्चे त्योहार की खुशियों में शामिल होने के लिए जलते रहेंगे आखिर कब तक।

क्या ऊपर वाले की खुशियों में इन जैसे गरीब विधवाओंं का कोई हक नहीं ? क्या हम अपनी खुशियों के मौके पर अपनी ख्वाहिशों में से थोड़े पैसे निकाल कर अपने समाज मे मौजूद गरीब और बेसहारों की मदद नहीं कर सकते।

आप सब भी ठंडे दिमाग से एक बार जरूर सोचना ! ! ! !

और हाँ अगर आँखें भर आईं हो तो छलक जाने देना संकोच मत करना..😢

अगर हो सके तो इस लेख को उन सभी सक्षम लोगो को बताना  ताकि हमारी इस छोटी सी कोशिश से किसी भी सक्षम के दिल मे गरीबों के प्रति हमदर्दी का जज़्बा ही जाग जाये और यही लेख किसी भी गरीब के घर की खुशियों की वजह बन जाये।

यह प्रेरक बोध कथा

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