हमको ओढावे चदरियाँ
हमको ओढावे चदरियाँ ।
चलत बेरीया, चलत बेरीया ... हमको
प्राण राम जब निकसन लागे ।
उलट गई दो नैन पुतरीया ... हमको
भीतर से जब बाहिर लाये ।
तूट गये सब महेल अटरियाँ ... हमको
चार जन मिल हाथ उठाइन ।
रोवत ले चले डगर डगरियाँ ... हमको
कहत कबीर सुनो भाई साधो ।
संग जली वो तो तूटी लकडीयाँ ... हमको
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