हमारे गुरु मिले ब्रह्मज्ञानी,
पाई अमर निशानी
हमारे गुरु मिले ब्रह्मज्ञानी,
पाई अमर निशानी ॥
काग पलट गुरु हंसा किन्हें,
दिनी नाम निशानी ।
हंसा पहूँचे सुख सागर पर
मुक्ति भरे जहाँ पानी ॥
जल बीच कुंभ,
कुंभ बिच जल है,
बाहर भीतर पानी ।
निकस्यो कुंभजल जल ही समाना,
ये गति विरले ने जानी ॥
है अथाग था संतन में दरिया लहर समानी । जीवर जाल डालका तरी है,
जब मीन बिखल भय पानी ॥
अनुभव का ज्ञान उजलत दिवानी,
सो है अकथ कहानी ।
कहत कबीर गुंगे की सेना,
जीन जानी उन मानी ॥
बुधवार, 2 जनवरी 2019
कबीर दास के भजन हिंदी में kabir das ke bhajan in hindi
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