बुधवार, 29 जनवरी 2020

संस्कृत का एक पुराना श्लोक है, जो कर्म को किस्मत से महत्तवपूर्ण बताता है-

संस्कृत का एक पुराना श्लोक है, जो कर्म को किस्मत से महत्तवपूर्ण बताता है-

उद्यमेन हि सिध्यंति कार्याणि न मनोरथै:। 

न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगा:॥

अर्थात - कोई भी काम कड़ी मेहनत से ही पूरा होता है सिर्फ सोचने भर से नहीं। कभी भी सोते हुए शेर के मुंह में हिरण खुद नहीं आ जाता।

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