मंगलवार, 1 जनवरी 2019

कबीर के दोहे हिंदी में अर्थ सहित

दोहा १३

दुर्लभ मानुष जन्म है, देह न बारम्बार
, तरुवर ज्यों पत्ता झड़े, बहुरि न लागे डार।

अर्थ: इस संसार में मनुष्य का जन्म मुश्किल से मिलता है. यह मानव शरीर उसी तरह बार-बार नहीं मिलता जैसे वृक्ष से पत्ता झड़ जाए तो दोबारा डाल पर नहीं लगता.

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