बुधवार, 2 जनवरी 2019

कबीर के भजन

झीनी झीनी बीनी चदरिया

झीनी झीनी बीनी चदरिया ॥
काहे कै ताना, काहे कै भरनी, कौन तार से बीनी चदरिया ।
इंगला पिङ्गला ताना भरनी, सुषमन तार से बीनी चदरिया ॥
आठ कँवल दल चरखा डोलै, पाँच तत्त्व, गुन तीनी चदरिया ।
साँई को सियत मास दस लागे, ठोंक ठोंक कै बीनी चदरिया ॥
सो चादर सुर नर मुनि ओढी, ओढि कै मैली कीनी चदरिया ।
दास कबीर जतन करि ओढी, ज्यों कीं त्यों धर दीनी चदरिया ॥

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