नींद निशानी मौत की
नींद निशानी मौत की, उठ कबीरा जाग,
ओर रसायन छांडी के, नाम रसायन लाग ।
नींद से अब जाग बन्दे, राम में अब मन रमा,
निर्गुना से लाग बन्दे, है वही परमात्मा ... नींद से
हो गइ है भोर कब से, ज्ञान का सूरज उगा,
जा रही हर साँस बिरथा, साँइ सुमिरन में लगा ... नींद से
फिर न पायेगा तु अवसर, कर ले अपना तु भला,
स्वप्न के बंधन है जुठे, मोह से मन को छुडा ... नींद से
धार ले सतनाम साथी, बंदगी कर ले जरा,
नैन जो उलटे कबीरा, साँई तो सन्मुख खडा ... नींद से
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