सोमवार, 5 मार्च 2018

ज़िंदगी का कड़वा सच

ज़िंदगी का कड़वा सच

एक भिखारी था | वह न ठीक सेखाता था, न पीता था,जिस वजह सेउसका बूढ़ा शरीर सूखकर कांटा हो गया था |उसकी एक - एक हड्डी गिनी जा सकती थी |उसकी आंखोंकी ज्योति चली गईथी |उसेकोढ़ हो गया था | बेचारा रास्तेकेएक ओर बैठकर गिड़गिड़ाते हुएभीख मांगा करता था |एक युवक उस रास्तेसेरोज निकलता था |भिखारी को देखकर उसेबड़ा बुरा लगता |उसका मन बहुत ही दुखी होता |वह सोचता, वह क्यों भीख मांगता है?जीनेसेउसे मोह क्योंहै? भगवान उसेउठा क्योंनहींलेते? एक दिन उससे न रहा गया |? वह भिखारी केपास गया और बोला - बाबा, तुम्हारी ऐसी हालत होगईहै फिर भी तुमजीना चाहते होतुम भीख मांगतेहो,पर ईश्वर सेयह प्रार्थना क्योंनहीं करतेकि वह तुम्हेंअपनेपास बुला ले? भिखारी नेमुंह खोला - भैया तुम जो कह रहेहो,वही बात मेरेमन मेंभी उठती है| मैं भगवान से बराबर प्रार्थना करता हूं, पर वह मेरी सुनता ही नहीं| शायद वह चाहता हैकि मैंइस धरती पर रहूं,जिससेदुनिया के लोग मुझेदेखेंऔर समझेंकि एक दिन मैंभी उनकी ही तरह था,लेकिन वह दिन भी आ सकता है, जबकि वेमेरी तरह हो सकते हैं|इसलिए किसी को घमंड नहींकरना चाहिए | लड़का भिखारी की ओर देखता रह गया | उसनेजो कहा था,उसमेंकितनी बड़ी सच्चाई समाई हुईथी | यह जिंदगी का एक कड़वा सच था, जिसेमाननेवालेप्रभु की सीख भी मानतेहैं|

समाप्त

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