शुक्रवार, 2 फ़रवरी 2018

दोहा doha

दोहा ६२

गुरु गोविन्द दोऊ एक हैं, दुजा सब आकार ।
आपा मैटैं हरि भजैं , तब पावैं दीदार ।।

अर्थ:
गुरु और गोविंद दोनो एक ही हैं केवळ नाम का अंतर है । गुरु का बाह्य(शारीरिक) रूप चाहे जैसा हो किन्तु अंदर से गुरु और गोविंद मे कोई अंतर नही है। मन से अहंकार कि भावना का त्याग करके सरल ओऊ सहज होकार आत्म ध्यान करणे से सद्गुरू का दर्शन प्राप्त होगा । जिससे प्राणी का कल्याण होगा । जब तक मन  मे मैलरूपी “माई और तू” कि भावना रहेगी तब तक दर्शन नहीं प्राप्त  हो सकता ।

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