बर्दाश्त करो तो कमजोर, सामना करो तो बद्दतमीज !
कोशिश कीजिये हमें याद करने की,
लम्हें तो अपने आप ही मिल जायेंगे,
तमन्ना कीजिये हमें मिलने की,
बहाने तो अपने आप ही, मिल जायेंगे।
आज मुस्कुराने की हिम्मत नहीं मुझ में..
आज टूट कर मुझे तेरी याद आ रही है..
सिर्फ ख्वाबो से ही नही मिलता सुकुन सोने का,
किसी की याद मे जागने का मजा ही कुछ और है।
अच्छा एक सिगरेटे पी के आता हूँ,
एक याद फसी है उसे धुए में उड़ा के आता हूँ।
ये अच्छा उसने मेरे कतल का तरीका ईजाद किया,
मर जाता मैं हिचकियो से, इतना मुझे याद किया।
दुनियाँ भर की यादें हम से मिलने आती हैं
शाम ढले इस सूने घर में मेला लगता है।
मजबूरी में नहीं दिल करे तो याद करना,
दुनिया से फुर्सत मिले तो याद करना,
दुआ है ज़माने की हर ख़ुशी मिले आपको,
फिर भी आँख भर आये तो याद करना।
बनकर लब्ज मेरी किताबों में मिलना,
बनकर सुगंध मेरे गुलाबों में मिलना,
जब आयेगी तुम्हें हमारी याद,
बनकर ख्वाब मेरी आँखों में मिलना।
शिकायत न करता ज़माने से कोई,
अगर मान जाता मनाने से कोई,
फिर किसी को याद करता न कोई,
अगर भूल जाता भुलाने से कोई।
ये कसमें ये रस्में ये ज़माने का डर,
रुलाएगी मुझे बहुत तेरी याद उमर भर।
एक आरज़ू सी है कि उन्हें भूल जाएँ हम,
मगर उनकी यादों के आगे तो यह हसरत भी हार जाती है।








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