लीलाधारी श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व बहुत ही रहस्यमयी है। उन्होंने गीता के रूप में संसार को जो ज्ञान दिया है उसमें धर्म, दर्शन और अध्यात्म की सभी धाराएं समाहित की। आओ आज जानते हैं श्रीकृष्ण की 3 माताओं के बारे में संक्षिप्त जानकारी।

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1. देवकी : यह श्रीकृष्ण की सगी माता थी। महाभारत काल में मथुरा के राजा कंस के पिता महाराजा उग्रसेन के भाई देवक की कन्या थी। इन्हें अदिति का अवतार भी माना जाता है। इनका विवाह वसुदेव से हुआ। इसलिए श्रीकृष्ण को देवकीनंदन और वासुदेव भी कहते हैं।

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2. रोहिणी : वसुदेव की दूसरी पत्नी रोहिणी से सुभद्रा नामक श्रीकृष्ण की एक बहन थीं। जिसका विवाह अर्जुन से हुआ और वो अभिमन्यु की माता थीं। रोहिणी ने ही देवकी के सातवें गर्भ को ग्रहण कर लिया था और उसी से स्वयं बलराम की उत्पत्ति हुई थी। ये यशोदा माता के यहां रहती थीं। कहते हैं कि जब कश्यप जी ने वसुदेव के रूप में जन्म धारण किया, तब उनकी पत्नी सर्पों की माता कद्रू भी रोहिणी के रूप में उत्पन्न हुई।

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3. यशोदा : यशोदा ने ही भगवान श्रीकृष्ण का लालन पालन किया था इसलिए वह सगी और सौतेली माता से भी बढ़कर थीं।यशोदा ने बलराम के पालन पोषण की भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जो रोहिणी के पुत्र और सुभद्रा के भाई थे। उनकी एक पुत्री का भी वर्णन मिलता है जिसका नाम एकांगा था।