जरुरत से ज्यादा अच्छे बनोगे तो, जरुरत से ज्यादा इस्तेमाल किये जाओगे
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कोशिश भी कर उमीद भी रख रास्ता भी चुन
फिर इस के ब’अद थोड़ा मुक़द्दर तलाश कर...
छत कहाँ थी नसीब में,फुटपाथ को ही जागीर समझे
छालों से कटी हथेली,हम किस्मत की लकीर समझे
वक़्त मेरी तबाही पे हँसता रहा
रंग तकदीर क्या क्या बदलती रही…
हमसे क़ायम है ज़माने में तमद्दुम का निज़ाम
मुर्दा तहज़ीबो के परस्तार नहीं है हम लोग...
इसमें में भी रब बसता है, उसमे भी खुदा का साया है,
दुनिया उसकी महफ़िल है, फिर कौन यहाँ पराया है।
मौत जिस्म की रिवायत है,
रूह को बस लिबास बदलना है।
कोन सा गुनाह किया तूने, ए दिल।
ना ज़िन्दगी जीने देती है, ना मौत आती है।








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