शुक्रवार, 11 जनवरी 2019

Jindgi shayari in Hindi shayari जिन्दगी की खासियत शायरी हिन्दी जिन्दगी अनमोल शायरी हिन्दी

थोड़ी मस्ती थोड़ा सा ईमान बचा पाया हूँ;
ये क्या कम है मैं अपनी पहचान बचा पाया हूँ; कुछ उम्मीदें, कुछ सपने, कुछ महकी-महकी यादें; जीने का मैं इतना ही सामान बचा पाया हूँ।

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