जय श्री राधे कृष्णा
कल्याण का सुलभ उपाय – अच्छा व्यवहार
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तुमसे कोई बुरा बर्ताव करे तो उसके साथ भी
अच्छा बर्ताव करो और ऐसा करके अभिमान न करो।
दूसरे की भलाई में तुम जितना ही अपने अहंकार और
जागतिक स्वार्थ को भूलोगे, उतना ही अधिक तुम्हारा
वास्तविक हित होगा।
सबके साथ सहानुभूति और नम्रता से युक्त
मित्रता का बर्ताव करो। संसार में अधिक मनुष्य
ऐसे ही मिलेंगे, जिनकी कठिनाईयाँ, जिनके कष्ट
तुम्हारी कल्पना से कहीं अधिक हैं। तुम इस बात को
समझ लो और किसी के साथ भी अनादर और द्वेष
का व्यवहार न करके विशेष प्रेम का व्यवहार करो।
यह बात याद रखने की है की भगवान के राज्य
में भलाई का फल बुराई कभी हो नहीं सकता। इसी
तरह बुराई का फल भलाई नहीं होता। तुम्हारे साथ
यदि कोई बुरा बर्ताव करता है और तुम भी यदि
उसके साथ वैसा ही बर्ताव करोगे तो इससे यही
सिद्ध होगा की तुम्हारे अंदर कोई ऐसा दोष भरा है,
जो यह चाहता है की लोग तुमसे द्वेष करें और तुमको
सतायें।
ऐसा न होता तो तुम अच्छा बर्ताव करते और
उसके बदले में भगवान के न्याय से अब नहीं तो कुछ
दिनों बाद तुम्हें अच्छा बर्ताव मिलता ही। अच्छे
बर्ताव के फलस्वरूप आपके हृदय में अच्छाई का
भरना तो अनिवार्य ही है।
अच्छा बर्ताव– निश्चल प्रेम का व्यवहार करके
सब में भलाई का और प्रेम का वितरण करो। यही
सच्ची सहायता और सच्चा आश्वासन है। आप जैसा
व्यवहार करेंगे, वैसा ही जगत को देंगे और वैसा ही
आप पाएंगे भी।
सभी को प्रेमभरी मधुरता और सहानुभूतिभरी
आँखों से देंखे। सुखी जीवन के लिए प्रेम ही खूराक
है। संसार इसी की भूख से मर रहा है। अतएव प्रेम-
वितरण करो – अपने हृदय में ही मत छिपा रखो; उसे
उदारता के साथ बांटो। इससे जगत का बहुत-सा
दुःख दूर हो जायगा।
जय श्री कृष्णा
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