काहे न मंगल गावे, जशोदा मैया
काहे न मंगल गावे, जशोदा मैया काहे न मंगल गावे
पुरण ब्रह्म सकल अविनाशी सो तेरी धेनु चरावे ... जशोदा मैया
कोटि कोटि ब्रह्मांड के कर्ता, जप तप ध्यान न आवे,
ना जानु यह कौन पुण्य से ताको गोद खिलावे ... जशोदा मैया
ब्रह्मादिक इन्द्रादि शंकर निगम नेति करी गावे,
शेष सहस्त्र मुख रटत निरंतर, ताको पार न आवे ... जशोदा मैया
सुंदर वदन कमलदल लोचन, गौधन के संग आवे,
मात जशोदा करत आरती, कबीरा दर्शन पावे ... जशोदा मैया
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