राम रहीम एक है रे
राम रहीम एक है रे, काहे करो लडाई
वह निर्गुनीया अगम अपारा, तीनो लोक सहाई ।
वेद पढंते पंडित हो गये, सत्य नाम नहीं जाना,
कहे कबीरा ध्यान भजन से पाया पद निर्वाना ।
एक ही माटी की सब काया, उंच नीच कोऊ नांहि,
एक ही ज्योत भरे कबीरा, सब घट अंतरमांहि ।
यही अनमोलक जीवन पाके सदगुरु शबद ध्यावो,
कहत कबीरा फलक मे सारी एक अलख दरसावो ।
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